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गजरौला ॲग़ेजो के जमाने का कस्वा है। गजरौला से ॲग़ेजो का लशकर जॅगली जानवरॊ का शिकार करने बास्टा और खानपुर खादर के जॅगलॊ में जाया करते थे। गजरौला में रामचन्द॒ जी का विशाल मॅदिर है। गजरौला से ८ किमी पर गंगा नदी है। जॊ तिगरी धॉम के नाम से जाना जाता है तथा तिगरी को मुक़ित धाम के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ हर साल काति॔क पूणि॔मा कॊ गॅगा मेला लगता है जहॉ पर लाखो लौग गॅगा में नहा कर पुण्य कमाते हैं। श्रदृालुओ की अपेछा सॅसाधनो का अभाव है। गजरौला से १२ किमी पर वॄजघाट धाम गॅगा नदी किनारे बसा है। गजरौला में उतर रेलवे का जॅक़शन है। यहाँ से प॒तिदिन हजारो याञी दिऌी मुरादाबाद लखनऊ देहरादून नजीबाबाद सहारनपुर हरिदृार को याञा करते हैं। जबकि गजरौला में कम रेलो का ठहराव है। इस बजह से याञी रॊडबेज बस का सहारा लेते हैं। चूकि गजरौला से ०८ किमी पर गॅगा नदी है। इसलिए गजरौला में बहुत समय पहले जॅगली जानवर आते थे। माना जाता है कि गजरौला में किसी समय जब यहाँ काफी जॅगल था तब यहाँ हाथियों की काफी संख्या हुआ करती थी। जब हाथी थे तो वे शोर भी करते होंगे। इसलिए इसे इस तरह समझा जा सकता है। गज+रौला। इसलिए हाथियों के शोर की वजह से नगर का नाम गजरौला पड़ा। इसके अलावा भी कई कहानियाँ प्रचलित हैं। वर्तमान में यह एक नगर पालिका बन चुका है गजरौला में छोटे-बड़े कई उद्योग लगे हुए हैं। इसलिए गजरौला को औद्योगिक नगरी भी कहा जाता है। यहां स्थापित उद्योगों में सबसे बड़ी फैक्टरी का नाम जुबीलेंट लाइफ सांइसेस है जो पहले जुबीलेंट लाइफ साइन्सेज़ के नाम से जानी जाती थी। उद्योग इस प्रकार हैं :
• जुबीलेंट लाइफ साइन्सेज़
• उमंग डेयरी
• इन्सिल्को
• ए.स.पी
• कोरल न्यूज़ प्रिंट
• रौनक
• टेवा एपीआइ लि
• यू.एस.फूड्स लि.
• शिवालिक सेलोलॉस
• चड्डा रबर